Treasure Island

jitendra pathak


मै नेता हूँ


मै नेता हूँ.
मै नेता हूँ और एक बढ़िया बनिया हूँ,
क्योंकि मै सीटों का क्रेता हूँ विक्रेता हूँ.
मोल-भाव की मेरी अलग बोली है,
लोगो को कैसे मुर्ख बनाये, इसकी मैंने दुकान खोली है.
मै सरकार गिराने की साजिशें बनता हूँ,
और दुसरो की साजिशों में खुद को पाता हूँ.
कभी रेलवे, कभी फिनांस तो कभी संचार पाता हूँ,
कुछ करूँ न करूँ, पर माल खूब कमाता हूँ.
जनता ने मुझे चुना, क्योंकि उन्हें चुनना था,
मै चुनाव जीता क्योंकि -मुझे माल कुटना था.
जनता का चुना हुआ मैं जनप्रतिनिधि हूँ,
इसलिए समेकित बुराइयों का मै सह्प्रतिनिधि हूँ.
मै क्रेता हूँ, मै विक्रेता हूँ,
मै नेता हूँ.

Submitted: Saturday, April 12, 2014

Do you like this poem?
0 person liked.
0 person did not like.

What do you think this poem is about?



Topic(s): greed

Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?

improve

Comments about this poem (मै नेता हूँ by jitendra pathak )

Enter the verification code :

There is no comment submitted by members..
[Hata Bildir]