Manish Shokeen

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एक लाला जी की छोरी यारो, फैन हो गयी जाट की - Poem by Manish Shokeen

वा नंबर देके न्यू बोली,
तू बात कर लिए फ़ोन प, ,
इब काम त फुरसत कोन्या,
मन्नै लिया ट्रेक्टर लोन प, ,
मेरी जिंदगी डेंजर जोन प,
र ना घर की ना घाट की, ,
एक लाला जी की छोरी यारो,
फैन हो गयी जाट की, ,

Topic(s) of this poem: bio

Form: Blues Poem


Comments about एक लाला जी की छोरी यारो, फैन हो गयी जाट की by Manish Shokeen

  • Rajnish Manga (9/9/2016 2:19:00 PM)


    आपकी रोचक शैली का तो हर पाठक फैन बन जायेगा. इसमें कोई शक़ नहीं कि यह एक ऊँचे दर्जे की कविता है. बहुत बढ़िया, मनीष जी. (Report) Reply

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Poem Submitted: Tuesday, September 6, 2016

Poem Edited: Tuesday, September 6, 2016


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