sumit jain

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Best Poem of sumit jain

मौत का दामन थामा

खुशियो के माहोल में जन्मा
हर कोई मुझे खिलाता
सब कि चाहत में बनजाता
कभी में रोता तो कभी में हस्ता
अपनी ही दुनिया में रम जाता
माँ कि लोरिया सुनते
मेरा बचपन युही गुजर जाता
जब से में जन्मा
तब से मेने मौत का दामन थामा

गर्व से मैं इठलाता जवानी पर
कुछ कर दिखाने कि चाहत है
मानो जोश सा है जिन्दंगी में
में भूल गया हु खुद को इस चकाचौंध में
में भाग रहा हु चंद रुपियो कि चाह में
यहा रिश्ते बनते है और बिगड़ते है
न जाने फस गया हु रिश्तो के भवर में
मानो खुद से आख मिचोली कर रहा हु
न जाने कब समझुंगा,
समय हाथ से निकलता जारहा है
और बुढ़ापा हावी होरहा ...

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