Sandhya Jane


और इस तरह मैंने ज़िंदगी को आसान कर लिया... - Poem by Sandhya Jane

कुछ इस तरह मैंने जिंदगी
को आसान कर लिया....

किसी से माफ़ी माँग ली
और किसी को माफ़ कर दिया....

किसी को भुलने के लिये कहा
और किसी को भुला दिया(?) ...

किसी की ख़ामोशी को समझा
और किसी के लिये ख़ामोशी अपना लिया...

इन रिश्तों की उलझनों में
मैंने ख़ुद को कही खो दिया...

और इस तरह मैंने ज़िंदगी
को आसान कर लिया...

- संध्या


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Poem Submitted: Thursday, July 24, 2014

Poem Edited: Thursday, July 24, 2014


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