hasmukh amathalal

Gold Star - 66,573 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

जी छोटा ना करना.. Ji Chhoa Na Karna - Poem by hasmukh amathalal

जी छोटा ना करना

मेरा यार मुझ से रूठा है
वो जग में सब से अनूठा है
उसे मनाने आज मुझे जाना है
उसे खीचके वापस लाना है

मेरा प्यार है मुझे जी वरगा
अजीज सब से और स्वर्ग सरीखा
उसका बारे मुझे कुछ नहीं कहना
दिल में समाया है सभी दुःख सहना

उसका आना युही सहज था
मेल हमारा सिर्फ महज था
अब क्या हो गया है खुदा ही जाने
प्यार के पतंगे है, जल जायेंगे परवाने

वो पत्थर दिल कभी नहीं थी
'शिल्प' से बनी कोई मूरत भी नहीं थी
आज कल रुख थोड़ा सा बदला हुआ है
चाँद बादल में यु ही छुपा है

ना कर तंग और गिला रख मन में
वारी वारी जाऊ में तेरे नयनमें
तेरी एक इश्क नजर, सब कुछ भुला दे
चाहे कोई ले ले सब कुछ बस मुझे भी मिला दे

ना मैंने पूछा ना उसने भी चाहां
वादा हम दोनों का एक ही रहा
छोड़ के एक दुझे को ना जाना
सब कुछ करना, पर जी छोटा ना करना


Comments about जी छोटा ना करना.. Ji Chhoa Na Karna by hasmukh amathalal

  • Gold Star - 66,573 Points Mehta Hasmukh Amathalal (8/14/2013 12:12:00 AM)

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Poem Submitted: Wednesday, August 14, 2013

Poem Edited: Wednesday, August 14, 2013


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