hasmukh amathalal

Gold Star - 68,679 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

Koi Maina Nahi - Poem by hasmukh amathalal

कोई मायना नहीं रखता है

पता नहीं कितनी रातें गुजर गयी
उनकी यादों मे और फजर हो गयी
दिन रात और साल भी बदल गए
पर हम उसी शक्ल में राह ढूंढ़ते रह गए

'हम नहीं भूलेंगे ' ये सुनहरे पल
आपने हलके से बोले थे बोल
आज भी वो गूंज रहे है
मुझे मेरी गमगीनी का राज बता रहे है

क्यों न रख सके आप अपना वादा?
क्यों जख्म दे दिए मुझे ताज़ा?
मैंने तो साथ रेहने का दिया था वचन
आपने क्यों नहीं किया मेंरा चयन?

आपने अंत तक अपने पत्ते नही खोले
हमने अपना सब कुछ दे डाला बोले बोले
ना समज पाया में आपके दिल की हलचल
कहके तो देखते 'अब बस हो गया, अब चलता बन'?

में देवदास तो न बन सका
पर शायर भी अच्छा ना बन सका
बस दिल की बात दिल में ही रख दी
दिल की दस्तक दिल तक ही रख दी

भूलना चाहता हूँ पर भूल नहीं सकता
रातो का गमगीन साया रोक नहीं सकता
ये सब मेरे गहरे दोस्त बन चुके है
बिन बुलाये मेहमान बन चुके है

रात की चुपकिदी और सन्नाटा मुझे है भाता
नहीं याद आता कोई मुझे सिर्फ माता और भ्राता
सभी तो मेरे दिल के बहुत ही करीब थे
पर आप की दोस्ती का रंग भी अजीब ही था

मेरे संग उनका ताना बाना बुन गया है
बस जीवन एक खुल्ली किताब का पन्ना हो गया है
हर कोई झांक के पाना उलटा सकता है
मर्जी करे तो देर तक रुक भी सकता है

हम जब गैरो से महोब्बत कर सकते है
तो आप तो हमारे करीबी और मेहमान हो चुके है
अब ये दिल कुछ भी सह सकता है
आपका आना और जाना अब कोई मायना ही नहीं रखता है


Comments about Koi Maina Nahi by hasmukh amathalal

  • Gold Star - 68,679 Points Mehta Hasmukh Amathalal (3/19/2013 8:03:00 PM)

    Taran Singh likes this.

    Taran Singh A real.....................
    8 hours ago · Unlike · 1

    Taran Singh Lovers live deathlessly,
    Without a question accept this truth.
    8 hours ago · Unlike · 1 (Report) Reply

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Poem Submitted: Tuesday, March 19, 2013

Poem Edited: Wednesday, March 20, 2013


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