hasmukh amathalal

(17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

वक्त भी आ गया है।vakt bhi


वक्त भी आ गया है।

जब से बना हूँ में हुस्ना का सैया
दिन एक भी ना बीता, जब में ना रोया
उसने कहा था ' आंसू न लाऊंगी '
पर प्यार से जरुर सताऊँगी।

पर जब पकड़ी मैंने उसकी बैया?
डूबने लगी जैसे मेरी नैया
डांवाडोल होने लगा जब उसने पढ़ा ननैया
छुडाली बाहें ओर गुस्सा दिखा दीया

मेरी जमीं आहिस्ता खिसक गयी
बारवां आसमान क्या होता है वो भी दिखा दिया
बस देखना अब रह गया क्या होगा अंजाम?
और कहाँ जाके रुकेगा हमारा मकाम।

उनकी हसरतें देखकर दिल रेह गया हैरान
क्योंकी हम भी जहाँ खड़े थे वो जगह थी वीरान
फूल खिलना तो दूर पौधा भी नजर नहीं आता है
बस बार बार उसका हसीं चेहरा ही नजर आता है।

बस हरदम कहा करते थे 'हम साथ नहीं छोड़ेंगे'
मरते दम तक जब तक सांस है 'एक साथ ही रहेंगे'
बस येही शब्द हरदम कानमे गूंजते रहते है
रातो में भी हम तारे गिनते रहते है।

उनकी हसरतें देखकर दिल रेह गया हैरान
क्योंकी हम भी जहाँ खड़े थे वो जगह थी वीरान
फूल खिलना तो दूर पौधा भी नजर नहीं आता है
बस बार बार उसका हसीं चेहरा ही नजर आता है।

बस हरदम कहा करते थे 'हम साथ नहीं छोड़ेंगे'
मरते दम तक जब तक सांस है 'एक साथ ही रहेंगे'
बस येही शब्द हरदम कानमे गूंजते रहते है
रातो में भी हम तारे गिनते रहते है

आज भी वो हमें देखते रहते है
आए दिन मेजबानी का पूरा ख्याल रखते है
हमने क़सम खा रखी है अपने उसूलों की
वादों की ओर हर कदम को सुनने की

बस बार बार उसका हसीं चेहरा ही नजर आता है

बस हरदम कहा करते थे 'हम साथ नहीं छोड़ेंगे'
मरते दम तक जब तक सांस है 'एक साथ ही रहेंगे'
बस येही शब्द हरदम कानमे गूंजते रहते है
रातो में भी हम तारे गिनते रहते है।

आज भी वो हमें देखते रहते है
आए दिन मेजबानी का पूरा ख्याल रखते है
हमने क़सम खा रखी है अपने उसूलों की
वादों की ओर हर कदम को सुनने की।

उनका दिल पसीज रहा है
कान में धीरे से 'प्लीज, प्लीज ' कह रहा है
हमें भी आजकल उनको मनाने का कसब आ गया है
हारजीत का फैसला करने का वक्त भी आ गया है।

Submitted: Monday, March 31, 2014
Edited: Tuesday, April 01, 2014

Do you like this poem?
0 person liked.
0 person did not like.

Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?

Comments about this poem (वक्त भी आ गया है।vakt bhi by hasmukh amathalal )

Enter the verification code :

Read all 37 comments »

Top Poems

  1. Phenomenal Woman
    Maya Angelou
  2. The Road Not Taken
    Robert Frost
  3. If You Forget Me
    Pablo Neruda
  4. Still I Rise
    Maya Angelou
  5. Dreams
    Langston Hughes
  6. Annabel Lee
    Edgar Allan Poe
  7. If
    Rudyard Kipling
  8. I Know Why The Caged Bird Sings
    Maya Angelou
  9. Stopping by Woods on a Snowy Evening
    Robert Frost
  10. Invictus
    William Ernest Henley

New Poems

  1. Private Obsession, Electric Lady
  2. Dispossessed Nests By Jayanta Mahapatra, Bijay Kant Dubey
  3. My Princess, Gabriel Jirgba
  4. THE PRETTY RAMADAN IS GOING TO EXPIRE AF.., MOHAMMAD SKATI
  5. Lullaby For The Doomed, Willian Menuci
  6. into her goblet, gordon nosworthy
  7. Night's Tale, Willian Menuci
  8. Soldiers, Tony Adah
  9. Morning Hymn, David Lessard
  10. How Bluntly Speak They, The CPI(M) Even.., Bijay Kant Dubey

Poem of the Day

poet Edgar Allan Poe

Kind solace in a dying hour!
Such, father, is not (now) my theme-
I will not madly deem that power
Of Earth may shrive me of the sin
...... Read complete »

 

Modern Poem

poet Jacques Prevert

 

Member Poem

[Hata Bildir]