Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

दुल्हन सी सजी धरती - Poem by Shashikant Nishant Sharma

दुल्हन सी सजी धरती
खेतों में आई हरियाली
हवा जो चलती
डोलती हैं सरसों की डाली
और गेहूं के पौधें
देखो कैसे हैं मौन साधें
चिड़ियों की चहचहाहट
किसी के आने की आहट
सुने दे रहा हैं
और दूर कही से
आ रहा हैं पवन
मचल रहा हैं आज
सुन रही का मन
सजन की आवाज
सुबह सुबह जब सूरज उगे
मनो यार ऐसा लगे
आये दुल्हन घूँघट उठाये
थोड़ी से वो सरमाये
और कोहरे की बाँहों में
मनो धीरे से सिमट जाये
आई बेदर्दी शर्दी
इस बार जल्दी
देखो तुम भी
दुल्हन सी सजी धरती
खेतों में आई हरियाली
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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