Lalit Kaira

Rookie - 496 Points (13/04/1985 / Binta, India)

मैं - Poem by Lalit Kaira

मैं नही जानता दर्शन क्या है
मुझमे जिजिविषा है
मै कठोर ह्रदय वाला हूँ
मैं ढल सकता था
तुम्हारी कल्पना मे
पर अब मुझे गढ़ा नही जा सकता
मैं पाँजे का पत्थर नहीं हूँ
सिर्फ घिसने वाला
मरने वाला

Topic(s) of this poem: life

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Poem Submitted: Monday, July 21, 2014

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