चाँद आज खुश और मज़बूत तू रहना
भार अपने चन्द्रयान का तुझे है सहना ।
समझाया है विक्रम प्रज्ञा को
...
In fleeting moments we find our fate,
A life so short, yet oh what weight.
We must seize each instant with zeal and fire,
Chasing dreams that our hearts desire.
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माझा चंद्रमा 🌝
चाँद आज खुश और मज़बूत तू रहना
भार अपने चन्द्रयान का तुझे है सहना ।
समझाया है विक्रम प्रज्ञा को
चोट बिलकुल ना पहुँचे मेरे चाँद को ।
बहुत हौले-हौले आराम से वो उतरेंगे
मुस्कुराते हुए परिचय वो अपना देंगे।
मामा कहता तुझे मेरे भारत का हर बच्चा
मोहब्बत का नाम देता तुझे हर आशिक सच्चा।
तुझे और ज़्यादा जानना चाहते है हम
इसलिए बनाने मैं चन्द्रयान को लगाया है दम।
नाराज़गी थी पीछली बार पर इस बार जाने ना देना
प्यार जो भेजा भारतीयों ने उसे गले से अपने लगा लेना।