Chhaviraj Chauhan

Chhaviraj Chauhan Poems

दिल से दिल लगा के दुलार कर
धड़कता है दिन रात इसका आभार कर
तला भुना खाने को तु इनकार कर
व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकाल कर
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संकट की घडी मे जो एक सहारा था
पचपन से जवानी तक आदर्श हमारा था
रहता था बेफ़िकर सा भरोसे जिसके
भाई वो मुझे जान से भी प्यारा था।
...

The Best Poem Of Chhaviraj Chauhan

व्यायाम कर

दिल से दिल लगा के दुलार कर
धड़कता है दिन रात इसका आभार कर
तला भुना खाने को तु इनकार कर
व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकाल कर
व्यायाम कर थोड़ा तु व्यायाम कर

ये दिल ही है जो जीवन का आधार है
बिना इसके हम सभी एक मृत लाश है
अहमियत को इसकी तु पहचान कर
व्यायाम कर थोड़ा तु व्यायाम कर।

किसी का भ्रात तु, किसी का भरतार हैं
जनक किसी का तु, किसी माँ का तु लाल हैं
रिश्तो का मोल है अनमोल ये तु जानकर
व्यायाम कर थोड़ा तु व्यायाम कर।


जिया है जिंदगी अब तक वो बेमिसाल हैं
दोलत भी अगर तेरे पास बेसुमार हैं
चिकित्सक का आना जाना भी तेरे द्वार हैं।
निकलते ही प्राण न आयेंगे काम ये विचार कर
व्यायाम कर थोड़ा तु व्यायाम कर।

जीने का अंदाज तेरा अगर बिंदास हैं।
दीर्घ आयु की मन मै तेरे एक आस है।
सगे संबंधी तेरे लिये अगर खास है।
मित्रो के लिये भी तेरी हर एक साँस हैं
बिछड़ने की पीड़ा को अहसास कर।
व्यायाम कर तु थोड़ा व्यायाम कर।


भागदोड से जिंदगी की तु परेशान हैं
जीवन मे न ही अगर आराम है
करता तु दिन रात सिर्फ काम हैं
पाना चाहता तु हर एक मुकाम है।
व्यस्तता को दिन भर की दरकिनार कर
व्यायाम कर तु थोड़ा व्यायाम कर।

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