Chhaviraj Chauhan Poems

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1.
व्यायाम कर

दिल से दिल लगा के दुलार कर
धड़कता है दिन रात इसका आभार कर
तला भुना खाने को तु इनकार कर
व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकाल कर
...

2.
भाई

संकट की घडी मे जो एक सहारा था
पचपन से जवानी तक आदर्श हमारा था
रहता था बेफ़िकर सा भरोसे जिसके
भाई वो मुझे जान से भी प्यारा था।
...

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