GOVIND MUDGAL

The Best Poem Of GOVIND MUDGAL

Dil Ki Kasmkas

हाले दिल मुहब्बत का मै किसी को बता नही सकता,
है कितनी मुहब्बत तुमसे ये लब से जता नहीँ सकता।
और अब तो हाल है असा,
बिना परोँ के परिन्दोँ जैसा।
मै तुझे आषमाँ की तरहाँ घूर तो सकता है, पर चाहकर भी तुझे पा नही सकता।
G.N.M

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