Hey! ! Just Read)
एक आखर
क्यों स्वपन सुनहरे बिसा जाती हो
क्यों चलते चलते रिसा जाती हो
अभी तुम मां की गोद में सिरान बनी थी
अभी तुम भाबर गए बखई सी वीरान बनी हो
अभी उकाव सी कठिन थी
अभी हुलार सी आसान बनी हो
अभी तुम थी उपराव यार
अभी तुम सीमार बनी हो
एक आँखर अंततः झांक ही दिया ना
तुमने मुझे
अभी झरोखों से, अभी उखोव से