Harshit kaira

Harshit kaira Poems

क्यों स्वपन सुनहरे बिसा जाती हो
क्यों चलते चलते रिसा जाती हो
अभी तुम मां की गोद में सिरान बनी थी
अभी तुम भाबर गए बखई सी वीरान बनी हो
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अंकगणित के प्रश्नों से निकल के
दर्शन से मनोविज्ञान में पिघल के

कला, साहित्य, विज्ञान के हाशिए से
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Harshit kaira Biography

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The Best Poem Of Harshit kaira

एक आखर

क्यों स्वपन सुनहरे बिसा जाती हो
क्यों चलते चलते रिसा जाती हो
अभी तुम मां की गोद में सिरान बनी थी
अभी तुम भाबर गए बखई सी वीरान बनी हो
अभी उकाव सी कठिन थी
अभी हुलार सी आसान बनी हो
अभी तुम थी उपराव यार
अभी तुम सीमार बनी हो
एक आँखर अंततः झांक ही दिया ना
तुमने मुझे
अभी झरोखों से, अभी उखोव से

Harshit kaira Comments

Harshit kaira Quotes

कठिन समय को सरल बनाता है प्रेम और उस प्रेम की कीमत है प्रेम

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