Harshit kaira Poems

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1.
एक आखर

क्यों स्वपन सुनहरे बिसा जाती हो
क्यों चलते चलते रिसा जाती हो
अभी तुम मां की गोद में सिरान बनी थी
अभी तुम भाबर गए बखई सी वीरान बनी हो
...

2.
हृदय

अंकगणित के प्रश्नों से निकल के
दर्शन से मनोविज्ञान में पिघल के

कला, साहित्य, विज्ञान के हाशिए से
...

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