क्या इश्क़ का सैलाब लिख दूँ मैं
या फिर कोई इंक़लाब लिख दूँ मैं
तमाम नफरतों को कर के रुसवा
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जैसा तुमने चाहा बिल्कुल वैसा है
ये ना पूछो हाल हमारा कैसा है
पढ़ना है तो पढ़ लो हर इक पन्ने को
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Her smile is the only thing
That brightens up my day
They make me feel a different way
It makes me feel like a shining star
...
Poet, Shayar, Storyteller, Published Writer)
लिख दूँ
क्या इश्क़ का सैलाब लिख दूँ मैं
या फिर कोई इंक़लाब लिख दूँ मैं
तमाम नफरतों को कर के रुसवा
मुहब्बत की इक किताब लिख दूँ मैं
बड़ा मुश्किल है यादों को संभालना
पन्नों में छिपा वो गुलाब लिख दूँ मैं
दरिया में उतरता और चढ़ता रहा
मेरे इन अश्क़ों को आब लिख दूँ मैं
ज़िन्दगी गुलज़ार हो गयी तुझ से
तेरे चेहरे को आफ़ताब लिख दूँ मैं
जब भी देखूं नशे में डूब जाता हूं
तेरी आंखों को शराब लिख दूं मैं
रोज तुझे पाने की नयी जद्दोज़हद
मुहब्बत में ये हिसाब लिख दूं मैं
- लव जोशी