आंसू ऐसे गिरे उसके मेरे कब्र पर,
संग मेरे काफिला हो गया,
कोई उसको भी मिले मेरी तरह चाहने वाला
यारो अब तो वो अकेला हो गया |
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दर्द को दिल में अब दफ्न कर लिया,
इश्क में चोट लगी ये केसा जख्म कर लिया|
आँखों से वो हर पल मेरी वह बह रहा हे,
मेने आंसुओ को खुद का कफ़न कर लिया|
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समझ ना पाओगे परदे का खेल तुम
गुनाहों का देवता तालीम मोहब्बत की देता हे |
वो चेहरा ऐसा नहीं हे जैसा नजर आता हे
काफिर मशवरा यहाँ इबादत का देता हे |
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जिन्दगी गुजर गई मोत को पाने मे
चिराग बुझ गया मेरा तेरा चिराग जलाने मे
तन्हाई का दर्द बिछड़ने के बाद पता चला मुझे
में रूठ गया खुद से तुझे मनाने मे |
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सारे खवाब जिन्दा हो सारे अरमान निकल जाए,
जो तू हां कर दे तो मेरी जान निकल जाए |
खोजे तो कोई सच्ची शिदत से एक दफा,
फिर किसी इंसान में कोई भगवान निकल जाए |
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लफ्जो कि डाली से तोड़ ला कुछ लफ्ज़,
चल बात करे|
अहसास के कुछ लफ्ज़,
कुछ इबादत के,
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में नही जानता
गीता बाइबल और कुरान|
में नहीं जानता
जीवन मरण और निर्वाण|
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दो वक्त के खाने का तकाजा हे घर मे मेरे,
फिर क्यों जमाना मुझसे मेरी दोलत पूछता है।
उसके प्यार का सलीका भी अजब निकला,
वो आज भी मुझसे मेरी सोहरत पूछता है।
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मेरा हर काम तेरी हुकूमत से होता है
मेरी अंगड़ाई की तू निगरानी रखा कर
में हर वक़्त हर पल तेरे साथ रहता हु
तू करवट बदलने में सावधानी रखा कर
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इश्क का कानून थोडा और सख्त हो
तेरी मोहब्बत के तमाम दुसरे किस्से जब्त हो|
हमारे अंदर जो दोड रहा है बदल सा गया है
गुजारिश है खून अपना पानी से फिर रक्त हो|
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एक दफा तुझ पर नजर क्या पड़ी चाँद की
उसने खुद को आईने में देखना शुरू कर दिया |
तेरी तपिस का अहसास जबसे हुआ
सूरज ने खुद को सेकना शुरू कर दिया |
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Writer, poet, Director, Automobile engineer.)
लेला मजनू हीर राँझा के बाद फिर तू नहले पे दहला हो गया |
आंसू ऐसे गिरे उसके मेरे कब्र पर,
संग मेरे काफिला हो गया,
कोई उसको भी मिले मेरी तरह चाहने वाला
यारो अब तो वो अकेला हो गया |
कब तक ओड़नी मेरे नाम की पहनेगी तू उतर फेक,
ये दाग अच्छा ही सही पर रिश्ता ये मेला हो गया |
अब तो उस दर से देखूंगा तुजे दुल्हन बनते हुए,
शाहिद सलमान जो आये सोचूंगा साला कोन तेरा दूल्हा हो गया |
देख रहा हु तेरे बदन में सुस्ती सी छायी हे,
मेरे जाने से साला बदन भी निदाला हो गया ||
तू क्यों अब भजन मण्डली में जाने लगी यार
तेरी वजह से पूरा मोहल्ला बाबा का चेला हो गया|
तू मेरी कब्र पर फातिमा पड़ने क्या आई मेरा ही नुकसान हे
मेरा चेहरा छिपा था आँखों में वो भी आंसू से गिला हो गया |
रोती बिलखती लिपट गई थी मुझसे जब जान ना बची,
तेरी एस नादानी से पुरे शहर में हल्ला हो गया |
पांचाल इस कदर क्यों मोहब्त में लोग बिछड जाते हे,
लेला मजनू हीर राँझा के बाद फिर तू नहले पे दहला हो गया ||
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