Ajay Srivastava

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स्वतन्त्रा - Poem by Ajay Srivastava

जाति धर्म के नाम पर लड़ने के लिए
जगह - जगह गंदगी फैलाने के लिए
भ्रटाचार को बढ़ावा देने के लिए
अपने कर्तव्यों को भूल जाने के लिए
अनैतिक कार्यो को करने के लिए
निर्दोष और असहाय प्राणी जीवन को मारने के लिए
हाँ हमें स्वतन्त्रा / आजादी चाहिए, हर कीमत पर चाहिए स्वतन्त्रा / आजादी
हाँ अब हम शिक्षित हो गए है ।
हाँ अब हम आधुनिक हो गए है ।
हाँ अब हम वैज्ञानिक तकनीक में भी आधुनिक हो गए है ।
हाँ हमें स्वतन्त्रा / आजादी चाहिए हर, कीमत पर चाहिए स्वतन्त्रा / आजादी

Topic(s) of this poem: freedom


Comments about स्वतन्त्रा by Ajay Srivastava

  • Rajnish Manga (9/23/2015 12:05:00 PM)


    अपने कर्तव्यों को भूल जाने के लिए तथा हर प्रकार के असामाजिक तथा अनैतिक कार्य करने की आज़ादी मांगते हैं तथाकथित शिक्षित व आधुनिक कहलाने वाले लोग. वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कड़वा कटाक्ष प्रस्तुत करने के लिये धन्यवाद, अजय श्रीवास्तव जी. चित्र के लिए अलग से धन्यवाद. (Report) Reply

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Poem Submitted: Wednesday, September 23, 2015



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