Ajay Srivastava

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वो कहते है - Poem by Ajay Srivastava

वो कहते है पराए हो गए|
हम कहते है पराए अपने हो गए|

वो कहते धर को छोड चले|
हम कहते धर को जोडने चले|

वो कहते है मर्यादा मे बधने चले|
हम कहते मर्यादा सीखाने चले|

वो कहते है प्यार देने चले|
हम कहते है प्यार को जोडने और बडाने चले|

वो कहते है निभाना होगा व मान सम्मान करना होगा|
हम कहते है कैसे निभाया जाता है सिखाने चले|

वो कहते है राह कठिन है|
हम कहते है शक्तिशाली ही कठिन राह पर चलते है |
और सफलता को पा लेते है|

Topic(s) of this poem: understanding


Comments about वो कहते है by Ajay Srivastava

  • Rajnish Manga (12/12/2015 5:04:00 AM)


    do pakshon ke vichar me ekroopta na ho to samajhdari se samayojan ki koshish jaruri hai. dhanywad, mitr. (Report) Reply

    Ajay Srivastava Ajay Srivastava (12/14/2015 3:58:00 AM)

    Thank you

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Poem Submitted: Saturday, December 12, 2015



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