Ajay Srivastava

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तुम जो यू - Poem by Ajay Srivastava

तुम जो यू अपनेआसू को बहाओगे
हम तुम्हारे आसू को गिरनेे से पहले अपने हाथ मे से लेगे|

तुम जो यू उदास होगे
हम खुशनुमा महोल बना देगे दूर कर देगे तुम्हारी उदासी|

तुम जो यू गुस्सा करोगे
हम प्यार से गुस्से को मुसकुराहट मे बदल देगे|

तुम जो यू मुसकराहट दोगे
हम उस मुसकुराहट को सब परिवार मे बाट देगे|

तुम जो यू प्यार जिस भाव मे दोगे
हम उसी भाव मे प्यार को समाज मे बाट देगे|

ऐसे प्यार की आवशयकता है मेरे, तुम्हारे और हमारे भारत वर्ष को|

Topic(s) of this poem: affection


Comments about तुम जो यू by Ajay Srivastava

  • Rajnish Manga (12/12/2015 5:12:00 AM)


    yadi har vyakti isi soch aur bhavna se kaam kare to desh ki har samasya ka samadhan nikal sakta hai. bahut sundar. chitra bhi akarshak hai. (Report) Reply

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Poem Submitted: Saturday, December 12, 2015



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