Ajay Srivastava

Gold Star - 11,191 Points (28/08/1964 / new delhi)

निडरता - Poem by Ajay Srivastava

जूठ को सच से

बेईमान को ईमानदार से

कमजोर को शक्तिशाली से

हर किसी को लगता है |


मिथ्या एहसास भी कराता है|

न चाहते हुए भी दिल में जगह बना लेता है|

इसको ख़रीदा भी जाता है |

इसको दिखाया भी जाता है|


सामना करने से सोचने लगता है|

आत्म विश्वास से भाग जाता है|

आत्मशक्ति को बढ़ाओ और डर का सामना कर

जीत लो निडरता यही समय की आवश्यकता है |

Topic(s) of this poem: fear


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Poem Submitted: Saturday, December 12, 2015

Poem Edited: Saturday, December 12, 2015


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