Ajay Srivastava

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सावन का मोसम - Poem by Ajay Srivastava

रिम झीम बारिश की बोछारो ने पतझढ को कह अलविदा
आपने आने दे दिया सबको संदेश और सबके चेहरो की रोनक ने
अहसास करा दिया की सावन का मोसम आ गया है 11
बहनो ने अपने भाईऔ की मगलकामना के साथ सावन के मोसम स्वागत का किया 11
सखी और सहेली रचा - सजा के अपने हाथो मे मेहदी का रंग
और पहन कर कलाईओ पर रंग बिरगी धानी चूडियाँ निकल पडी
चहकती और खिलखिलती अपने घरो से ढूडती हुई पहुच गयी
हरे भरे पीली सरसो लहराते खेतो मे आननद का अनुभव करती हई 11
कुछ ने पेडो पर डाल झूले और उस पर बेठ कर तेजी से झूलते
अपने कन्हैया के सपने मे खो गयी और उससे बात करती हुइ
सहसा झूले के रूकने से अहसास करा दिया की सावन का मोसम है 11
युवको ने भी बुला लिया अपने दोस्तों को और वे लेते रंग बिरगी पतगो
को दूर आकाश की ऊंचाई मे उडाते और पेच लगाते
आई - बो काटे, आई - बो काटे कहते उचछलते कूदते खूब आनंद लेते 11
सावन का मोसम तो हमारे पूर भारत देश को गोरनवित कराता और देश वीर सपूतो की याद
दिलाता है, ऐ सावन तू भी हम सबके साथ बोल भारत देश तुझे नमन 11


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Poem Submitted: Tuesday, January 22, 2013

Poem Edited: Tuesday, January 22, 2013


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