यूँ भर कर बाहों में मुझको, मुकम्मल आज तू कर दे Poem by Abhishek Omprakash Mishra

यूँ भर कर बाहों में मुझको, मुकम्मल आज तू कर दे

Rating: 5.0

मिला कर लब से लब मेरे, अमर अल्फ़ाज़ तू कर दे
छुपाये थे जो अब तक सब, उजागर राज तू कर दे
बिछड़ कर तब से मैं तुमसे सनम अब तक अधूरा हूँ
यूँ भर कर बाहों में मुझको, मुकम्मल आज तू कर दे
'अपर्णेय'

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
मिला कर लब से लब मेरे, अमर अल्फ़ाज़ तू कर दे
छुपाये थे जो अब तक सब, उजागर राज तू कर दे
बिछड़ कर तब से मैं तुमसे सनम अब तक अधूरा हूँ
यूँ भर कर बाहों में मुझको, मुकम्मल आज तू कर दे
'अपर्णेय'
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 01 March 2016

बहुत सुंदर और अद्वितीय. आज एक वर्ष बाद आपके दर्शन कर मन प्रसन्न हो गया. बहुत बहुत शुभकामनायें. धन्यवाद.

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