भारत की एकता Poem by Vinod Pandey

भारत की एकता

देशद्रोह से बड़ा पाप, धरती पर अब तक हुआ नहीं
इसके माफीनामे को भी, किसी सत्ताधारी ने छुआ नहीं |
भले राम ने माफ़ किया हो, औरों ने अवलोकन की,
हनूमान को सभी पूजते, कोई नहीं बिभीषण की |
अपना कुटुंब ही मुल्क बने जिसका सब सम्मान करें
इक दूजे के सुख दुख में शामिल, हो सभी नेक इंसान बनें |
ऐसा प्रयास हम सभी करें, जहाँ न डर न भय हो
बेटी बहनों की बढे प्रतिष्ठा, दामिनी न हो निर्भया न हो |
जाति-धर्म में रखा नहीं कुछ, इसका सब प्रतिरोध करें
नेकी ईमान भाईचारे का, हम सब से अनुरोध करें |
शिक्षा-विहीन और चरित्र-हीन इन अवगुण का निर्वाण करें
ऐसे समग्र-भारत विकास का आओ हम निर्माण करें........ |
- विनोद पाण्डेय

भारत की एकता
Tuesday, March 15, 2016
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