बनी जिंदगी जंगल सा वन, शीशा-ए-दिल टूट चुका;
रही ना हिम्मत खुद से लड़ने, की अंतर्मन टूट चुका |
हुई परायी अपनी ख़ुशी जब, ग़मों से नाता जोड़ लिया;
हुए पराये अपने ही जब, रिश्तों ने मुख मोड़ लिया |
गिरे मूल्य रिश्तों के फिर से, अन्दर से मै टूट चुका;
बनी जिंदगी जंगल सा वन, शीशा-ए-दिल टूट चुका;
रही ना हिम्मत खुद से लड़ने, की अंतर्मन टूट चुका |
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अंतर्मन के घात-प्रतिघात तथा भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति. धन्यवाद. एक उद्धरण: हुई परायी अपनी ख़ुशी जब, ग़मों से नाता जोड़ लिया; हुए पराये अपने ही जब, रिश्तों ने मुख मोड़ लिया |
साभार धन्यवाद रजनीश भाई जी