धरम अपना निभाने से... Poem by Vinod Pandey

धरम अपना निभाने से...

Rating: 5.0

धरम अपना निभाने से, किसी को दुःख तो क्या गम है;
मुकम्मल तो नहीं मै भी, मगर अपनी खबर ये है
कहे कोई, करे कुछ भी, मिली सौगात क्या कम है
वो मोड़ जिस पर पथ पृथक, मेरी सांसों में हरदम है |
खबर जिनको नहीं खुद की, मुझे लेकर उन्हें भ्रम है
मगर वीरानगी से लिप्त, तरकश शब्द वाणों का!
सुझाता मुझको, बधिर बनकर आज बस बोलूँ यही
कि रहें खुश सब, जहाँ जो हैं, यही शुभकामना मेरी...!
***

Thursday, March 17, 2016
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 17 March 2016

वाह! भाषा और विचार सूत्र अत्यंत प्रभावशाली है...... शुभकामनाएं. खबर जिनको नहीं खुद की, मुझे लेकर उन्हें भ्रम है कि रहें खुश सब, जहाँ जो हैं, यही शुभकामना मेरी...!

1 0 Reply
Vinod Pandey 17 March 2016

बहुत बहुत धन्यवाद हम आपकी शुभकामनाओ को सर माथे चढाते हैं बड़े भाई

0 0
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success