धरम अपना निभाने से, किसी को दुःख तो क्या गम है;
मुकम्मल तो नहीं मै भी, मगर अपनी खबर ये है
कहे कोई, करे कुछ भी, मिली सौगात क्या कम है
वो मोड़ जिस पर पथ पृथक, मेरी सांसों में हरदम है |
खबर जिनको नहीं खुद की, मुझे लेकर उन्हें भ्रम है
मगर वीरानगी से लिप्त, तरकश शब्द वाणों का!
सुझाता मुझको, बधिर बनकर आज बस बोलूँ यही
कि रहें खुश सब, जहाँ जो हैं, यही शुभकामना मेरी...!
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वाह! भाषा और विचार सूत्र अत्यंत प्रभावशाली है...... शुभकामनाएं. खबर जिनको नहीं खुद की, मुझे लेकर उन्हें भ्रम है कि रहें खुश सब, जहाँ जो हैं, यही शुभकामना मेरी...!
बहुत बहुत धन्यवाद हम आपकी शुभकामनाओ को सर माथे चढाते हैं बड़े भाई