सच को झूठा साबित करना... Poem by Vinod Pandey

सच को झूठा साबित करना...

सच को झूठा साबित करना,
दुनिया कि पुरानी आदत है
तुम रहो सलामत आगे बढ़ो,
ये मेरी अपनी इबादत है
तुम कितनी भी कोशिश कर लो,
मुझको लाघव दिखलाने की
मुझको ये मालूम भले से,
ये तो तुम्हारी आदत है
***

Thursday, March 17, 2016
Topic(s) of this poem: poem
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