देख फूल तू खुश् ना होगा
माली का दिल तोड़ के
अपने स्वार्थ के खातिर
चाहे जिससे रिश्ता जोड़ के
अपनी प्यारी बगिया को तू
छोड़ जहाँ भी जायेगा
देखना वहाँ पहुचने पर तू
टूट कर ही जाएगा
याद रहे की तेरा यौवन
जिस खुशबू से निखरता है
उस खुशबू की कद्र सिर्फ
वो माली ही कर सकता है
बगिया से जाने पर तेरा
गुमान नाश हो जायेगा
देखना वो दिलवाला तेरा
खुशबू नाश कर जायेगा
जब नन्ही सी कली बनकर
तू पौधों पर आया होगा
सोच उस वक़्त माली का मन
कितना खिलखिलाया होगा
तेरी उस बचपन से लेकर
खुशबू भरी जवानी तक
माली ने तुझे सींचा है
तेरी इस जवानी तक
ठण्ड धुप बरसात तूफ़ान
आंधी ने जब हिलाया होगा
तब उस माली ने ही तुझपे
खुद का सुरक्षा कवच बनाया होगा
बाहर कीमत खुशबू की लगती
कद्र कहा तेरी शीरत की
अगर कद्र होती शीरत की
तो वर्षा होती अमृत की
तुझको बातों में बहलाना
उनका बना ये जाल है
तेरी बर्बादी का
उनका सबसे बड़ा ये चाल है
झूठी कसम जो खायी होगी
अगर तूने उस भोले माली की
तो फिर तेरे पथ विनाश को
रोक नही सकता मै
सोच समझ ले तू है सयानी
अब कितना समझाऊँ मैं
झूटी तसल्ली देकर
माली को कितना बहलाऊँ मैं
भाई का हक़ अदा अब
ये 'रत्न' पुष्प कर जाता है
वर्ना तेरे तम भविष्य का
प्रभु ही भाग्य विधाता है।
-रत्नेश गाँधी
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem