Shashikant Nishant Sharma

Rookie - 133 Points (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

आ जाये न ओठों पे हंसी - Poem by Shashikant Nishant Sharma

आ जाये न ओठों पे हंसी
टूट जाये न ये उदासी
इसीलिए चुप रहता हूँ
कुछ न कहता हूँ
बस बैठा रहता हूँ
गम-शुम...
आ जाये न ओठों पे हसीं
टूट जाये न ये ख़ामोशी
इसीलिए अपने ओठों को रखता हूँ संभाले
साथ में मदिरा की बोतलें
हाथ में मधु पायलें
पी रह हूँ इन्हें
चूम-चूम...
आ जाएँ न ओठों पे हंसी
पता न चल जाये मेरी ऐयाशी
इसीलिए छुप छुपकर लेते है मजें
न हो जाये खुलेआम चर्चें
जी भरके हँसतें है
और नाचतें है
झूम -झूम...
आ जाये न ओठों पे हंसी
टूट जाये न ख़ामोशी
इसी लिए मन ही मन
करतें है लाखों बातें
टूट जाये न ध्यान
रहते है मस्त मगन
हर दम -हर दम...


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Poem Submitted: Wednesday, January 30, 2013



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