ज़िन्दगी की जंग जीतते जीतते Poem by ainan ahmad

ज़िन्दगी की जंग जीतते जीतते

ज़िन्दगी की जंग जीतते जीतते
मै ज़िन्दगी से हार कर गया
जितने की ऐसी नशा छायी मुझपे
उस बेवफा को जीतने की ज़िद्द ने मुझे
अब तो ज़माने के लिए बेकार कर गया
खुद का वजूद दे कर मैंने
खुदको बेसहारा और लाचार कर गया
यक़ीन तो वैसे मुक़द्दर पर थी
मगर न जाने क्यों मुहब्बत पर कर गया
जंग ज़िन्दगी की जीतते जीतते
मै ज़िन्दगी से हार कर गया
बेवजह सब कह रहे,
तुम लम्हे को जीत कर आये
सच तो ये हैं लम्हा मुझपे इख्तयार कर गया

Friday, February 10, 2017
Topic(s) of this poem: life
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