सीख पतंग से Poem by Ratnesh Gandhi

सीख पतंग से

Rating: 5.0

••सीख पतंग से••
आसमाँ में उड़ते पतंगों से सीखो,
अपनी जिंदगी की डोर
किसी और के हाथों में होते हुए भी,
आगे बढ़ते जाना, आगे ही बढ़ते जाना

ना जाने कितने विरोध की
आँधियो से जूझते हुए,
राह में आने वाले
हर कणों से लड़ते हुए,
सिर्फ एक निश्चय लेकर
आगे बढ़ते जाना, आगे ही बढ़ते जाना

अपने जिंदगी को हमेशा
रंग-बिरंगी और खुशहाल बनाएँगे,
अपने सम्मान के ख़ातिर
कट तो जाएँगे,
मगर, किसी अवरोध से डरकर
पीछे नहीं आएंगे,
सिर्फ एक पथ निश्चय करके
आगे बढ़ते जाना, आगे ही बढ़ते जाना

आसमाँ में उड़ते पतंगों से सीखो,
आगे बढ़ते जाना, आगे ही बढ़ते जाना

-रत्नेश गाँधी

Saturday, September 3, 2016
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