सम्बन्धों में बहार Poem by Ajay Srivastava

सम्बन्धों में बहार

मन के मैल का त्याग।
माना की अपनाना सरल नहीं है।
माना की कठिन है।


माना की राह दुर्गम है।
पर ना मानने का कारण भी तो नही है।
दुःख को दूर कर यदि सुख की चाहत है।

सुविचार का प्रवेश द्वार बनाना होगा।
सुख व शांति का आधार बनाना होगा।
व्यक्ति का व्यक्ति पर विश्वाश की राह बन जाएगी।
मधुर सम्बन्धों में बहार आ जाएगी।

सम्बन्धों में  बहार
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