बाकी हैं? Poem by ainan ahmad

बाकी हैं?

अब जानना भी हैं वो कितना दूर जाता हैं
चल कुछ दूर साथ चल कर देखें
हमने तो बहा दिया युहीं
क्या नमी भी खुश्क हो गयी
ज़रा आँखों में आँख डाल कर तो देखें
हम बेवफा हैं, या उनमे वफ़ा नहीं
बात दो चार कर के तो देखें
अब भी कसक बाकी हैं या सब भुला दिया
आँख अब भी फरकती है, या आदत बना लिया
ज़रा हाथो में डाल कर तो देखें

Tuesday, March 7, 2017
Topic(s) of this poem: love
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