मोनसेंटो कंपनी के बीज Poem by Malay Roychoudhury

मोनसेंटो कंपनी के बीज

मोनसेंटो कंपनी के बीज
वह हल के पैर के साथ जमीन से बाहर आया
यह कहना उचित नहीं है कि वह बाहर आया था, वह रो रहा था
बिना शेड का ब्लाउज। किसान हैरान हैं
जब सीता का जन्म हल पर हुआ था, तब
दो-अंतर राम की वंदना करते हुए अग्नि की कक्षा से गुजरे
अब आलू का खेत दिखा रहा है कि शोर क्यों हुआ है
अयोध्या, दंडकारण्य, बाल्मीकि का विशाल मठ!
यह पश्चिम बंगाल में गैंगस्टर नहीं है, शहर के लिए कोई सड़क नहीं है
बारिश में या गर्मियों में, रिश्तेदार आगे नहीं आते हैं
सर्दियों में पुलिस के साथ बक्सॉ-पैंट।
काश्तकार का चेहरा देखकर गाँव का चेहरा समझ गया कि गाँव
फेलू स्विमिंग गर्ल, तीन सप्ताह से उपलब्ध नहीं-

Friday, April 3, 2020
Topic(s) of this poem: death
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