रङ्गबति हउछे रङ्गेइ
गजानन मिश्र
केन देखुछेरे
तोर रङ्ग रङ्गबति,
एतकि सेतकि
हउछु रङ्गेइ!
रङ्गबतिर खातिर नेइ
करोनाके ।
काॅजे करता जे!
देननेन अछे भाएल!
मिलला चउल
मिलला टॅका
आरु काणा जरुरत
हेताके काएं निघा!
रङ्गबतिर ठाने
नेइन रस नेइ कह ।
रङ्गबति गुटामुटा तमर
घटाघटि तमर
बाकिसबु नेइ पचर!
ठिकभुल कहेसि रङ्गबति
भुलछुकरे जदरभि
भेटिदेल इनकेन
पचरेइपार खाएल न!
नेइ खाएबारबएले खेइदिअ
बलसकत नेइ प नेइहेले!
सबुजना इ रङ्गबतिके
घबर नेइ,ठिक कथा
कहेबा ठिक लोकके
ठिकबेले ।
घबर नेइ, रङ्गबति
अछे बएले अभाव
बलबारटा अछे
भुलि ज!
तपोवन, टिटिलागड, बलाङ्गीर
19/04/2020
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