गज़ल Poem by Akash solanki

गज़ल

Rating: 5.0

बे वक़्त वो खत हमें जमाने से मिले
वो खुशी कहाँ जो तेरे मुस्कुराने से मिले ।

सरे राह दोस्त भी टकराने से मिले
तेरी राह कुछ और थी ओर हम जमाने से जा मिले ।

मौसम कुुछ ओर था फुल गुलमोहर क खिले
बिछ्डे हुये यार आज टकराने से मिले ।

ना मुनासिब याद तेरी उन ठिकानों से मिले
वो दर्द तेरे प्यार का सर झुकने से मिले ।

वो खुशी जो मुझे तेरे साथ वक़्त बिताने से मिले
वो खुशियाँ कहाँ जो तेरे साथ मुस्कुराने से मिले ।।

COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 25 July 2018

प्रेम की भावना को समर्पित एक खुबसूरत ग़ज़ल. खूब लिखते रहिये. धन्यवाद.

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