चुराया मैंने तेरी नयनों की भाषा
पलकों में छीपी तेरी निगाहों ने
ना जाने मुझे, क्या जादू कर दी।
सरगम रचा, ये प्यासी दिल ने
और धड़कन ने, प्रेम गीत सुना दी ।
साथ मिलकर, मदहोशी दो नयनों ने
जब प्यार के, अमर- दीप जला दी ।
हमने भी चुराया, तेरी नयनों की भाषा
नयनों की भाषा, नयनों हीं जाने !
बीना बोले सब कहती ये तेरी आँखें
दर्पण जो हैं ये, कहता सब बातें ।
उगता सूरज देखूँ, तेरी इन निगाहों से
डूबू में चाँद-सी शीतल, पलकों के छाव में ।
बादलों के परछाई मे, झिलमिलाता दो दीपशिखाएँ
मुस्कराते इन नयनों को, मैं नील कमल समझलूँ ।
प्यार के इन सागर मे, डूब के, मैं मर न जाउँ
नयनों की भाषा, नयनो को हीं, समझने दे।
इतिहास रच दिया, बेजुबान दो प्रेमी ने
लफ़्जो बीना के, व प्रेम पत्र पढकर
आँख मिचौनी, सुरु हुई जबसे
हवा में खुशबू महकने लगा तबसे ।
रचनकार: - तुल्सी श्रेष्ठ
Composed by Tulsi Shrestha
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2018 October 12...20.35 AM
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