एक एहसास
धड़कन ने दिल से कहा
तू मेरे बिन किस काम का ।
एहसास जो तू ने, मुझ को दिला दी ।
शाश्वत हैं, मगर तू भी तो मेरा हीं उपज हैं ।
एक दुजे पर निर्भर हम
रिश्ता हम्हारा ऐसा
सूरज और किरण का जैसा ।
तेरे बिन में अधूरा
मेरे बिन तू अधूरी ।
प्रिय तू सुनले ये संवाद
दिल और धड़कन का
आओ प्रतीक बने हम दोनो, ये दो का ।
आजा, समाजा तू मुझमे
जैसा खुशबू फूलों में।
अब एहसास तू मुझे, मत दिला
सांसों से जीवन का क्या नाता ।
देख तू आसमा ने, चुमा धर्ती को
त्यागकर अपना अहभ को ।
प्यासा हम दो प्रेमी
धड़कन बने एक दुजे का
तेरी आँचल की शीतल छाव में
रचूं में एक नया दुनिया ।
ज्योति तू बने मेरे नयनों का
सूर्योदय मैं बनूं तेरे सवेरे का ।
मिलकर हम बनाए
रचना " औलोकिक सौंदर्य का"
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
Composed by Tulsi Shrestha
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