अजीब सा सूनापन
ऐसा क्यो लगता हैं मुझे
हर कोई यहां
अपने हीं लिए जीता हैं ।
ये रिश्ते, प्यार और स्नेह
सिर्फदिखावा हैं
छलावा हैं
और कुछ नही!
अजीब सा घुटन की
ऐहसास...!
डूबता सूरज के साध
डबुता दिल की धड़कन ।
कोलाहाल में भी सन्नाटा
हर कोई अजनबी
और खुदगर्ज जैसा ।
शब्दो के खिलाड़ी के पास
कहने के लिए
अब कुछ नहीं रहा ।
अजीब सा सूनापन, खामोसि
हर कोई अजनबीजैसा
क्यू लगता मुझे ।
हर पल अपनो के लिए
हीं तो जिन्दा रहा मैं ।
जब खुद के लिए
जीना चाहाँ तो
बहुत देर हो चुका ।
कुछ कहने के लिए
बचा हैं तो, एक हीं शब्द
"अलविदा "
रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
composed by Tulsi Shrestha
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2018...Dec 29...11.57 Am
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