बता दे तू हमे सौन्दर्य क्या हैं
जानकर कोई मुझे अंन्धा
बोला व हमें, बता तू
सौन्दर्य क्या हैं।
दिल की धड़कन सुनकर मैं
प्यार क्या हैं बता दू तुझे ।
प्यारा लगे जो कोई मुझे
सौन्दर्य की खुशबू
महसूस करता हूँ उसमें ।
सौन्दर्य बसा हैं हर चिज में
जो हमे मुस्कान दे ।
हर आवाज में छुपा दर्द को
अहसास मैं कर पाता हूँ ।
हर कदम की पदचाप को
मेैं पहचान सकता हूँ ।
सूघकर बता दू तुझे
ये कौन सा फूल हैं ।
छुकर तुझे मेैं बोलू
तू खुशी हैं या नहीं ।
ना देखकर भी मैं
बहती हुइ उन आँखों को
पहचान कर पाता हूँ ।
घाण, श्रवण, स्पर्श अनुभूति
और अन्तर-दृष्टि का स्पन्दन
मिलकर देगा तुझे
परिभाषा सौन्दर्य का।
तू बोलकर तो देख मुझको
रचना कर मैं दू तुझको
सौन्दर्य का शासत्व स्वरुप ।
रचनाकार: - तुल्सी श्रेष्ठ
By Tulsi Shrestha
@copyright reserved 24th June 2018
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