बुझने मत देना
दिल की ऐहसास को
आस्था की ज्योति को
देश भत्ति की
शौर्य गाथा को ।
दिल से होके गुजरे
और निकले नयनो से
ना समझना इसे पानी
ऐ तोआँसू की नदिया हैं ।
हरहोठों मे हम्हारे लिए
बस सदा प्यार हो
तुम सब की सांसों मे
हम्हारी खुशबू हो
अपमान ना हो
शहीद कि माँ कि कोख
बस यहीं चाहते हम सब
बुझन न पाय श्रध्दा ज्योति का ।
माठे का सिंदूर खोकर
जिसनेसिंचा इस देश को
अपना खून की आँसूओं से
ठेस ना पहुचे कभी
उन की भावना को ।
पिता माता भाइ बहेन
खुद सजनी को छोड़कर
हम जो शहीद हुए
कौम कि शान्ति के खातिर ।
भूल न जाना तुम सब लोग
सप्ताह के अंडर हम सबको
जिन्दा रखना दिल में हमे
धड़कन समझकर अपना ।
बलिदान हम सबका
व्यर्थ ना जाय
अमन चयन बना रहे
हम्हारी राखों में फूल खिले
हम मरे, ताकि तुम सब
जिन्दा रहे यह भूमि पर
बस यहीं चाहते हम ।
एहसास मेरी मा को दिला
ध्वजा देश का झुकता हेेै
वीर गाथा सुनकर मेरा ।
लगने लगे मेरी माँ को
अब हर कोहीं उनका
हीं तो बेटा हैं ।
दो रोटी के लिए
हातफैलाना ना पड़े
राष्ट्र को यह खयाल रहे
तब माँ गर्व से कह सके
मेैं शहीद कि माँ हूँ ।
हाँ मैं शहीद कि माँ ।
रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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