दिल ने धडकन खो दी
विश्वास का पंख जब टूटा
इंसानियत गिरकर दम तोड़ा।
सब अपने, अजनबी लगने लगा
हरपल धूटन सा महससू होने लगा ।
पैसो के लिएअब सबने
ईमान बेचते देखा मैंने।
समझ ना पाया मैं खुद को
दूसरो को मैं पहचाने केेैसे।
कोई ना मिला अब तक
जिसे मैं अपना कह सकू ।
पहचान जब मैने अपना खोया
चिंता जला प्यार और रिश्तो का ।
प्रवासी बना, अपने हीं कौम का
अजीब दस्तूर यह दुनिया का ।
जमीर को जब दम तोडते देखा मैंने
मुस्कराहट कि बजह खो दि मैने ।
अब तो मुझे ऐसा लगने लगा
सूरज नेरोशनी खो दि
और दिल ने भी धड़कन खो दिया ।
रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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