दिल ने धडकन खो दी Poem by Tulsi Shrestha

दिल ने धडकन खो दी

दिल ने धडकन खो दी

विश्वास का पंख जब टूटा
इंसानियत गिरकर दम तोड़ा।
सब अपने, अजनबी लगने लगा
हरपल धूटन सा महससू होने लगा ।
पैसो के लिएअब सबने
ईमान बेचते देखा मैंने।
समझ ना पाया मैं खुद को
दूसरो को मैं पहचाने केेैसे।
कोई ना मिला अब तक
जिसे मैं अपना कह सकू ।
पहचान जब मैने अपना खोया
चिंता जला प्यार और रिश्तो का ।
प्रवासी बना, अपने हीं कौम का
अजीब दस्तूर यह दुनिया का ।
जमीर को जब दम तोडते देखा मैंने
मुस्कराहट कि बजह खो दि मैने ।
अब तो मुझे ऐसा लगने लगा
सूरज नेरोशनी खो दि
और दिल ने भी धड़कन खो दिया ।


रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Sunday, March 31, 2019
Topic(s) of this poem: heart
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