क़ेद कर दी हैं, मेंने तेरी सौंदर्य को Poem by Tulsi Shrestha

क़ेद कर दी हैं, मेंने तेरी सौंदर्य को

क़ेेैद कर दी हैं, मैंने तेरी सौंदर्य को

तेरी लबों की हंसी को मैं
लफ़्जो में क़ेैंद कर दू ।
रस शृगार भरके इनमे
तेरी प्रीत अमर कर दू।

जग में, हम दो रहें ना रहें
तू फूल बनकर खिले ।
हवा बनकर तेरी साथ
मैं भी मेहकू, यह जगत में ।

बारिश के हर बूँद पर
नजर क्यो आता, मुझे तू हीं
यह क्या, तेरी प्यार में डूब कर
भूला दिया हमने, खुदा को भी।

बिखरे तेरी जज्बातों को
समेटकर प्रेम गीत रच दू ।
खामोशी तेरे इन आंखों को
सुनहरे सपनों से सजा दू ।

तेरी जुल्फो में छूपकर मेैं
घना रात के सन्नाटेंं में
मेरे दिल कि बातें
तेरी धड़कन सुना दू ।

तेरी पैर की हर आहट को
सरगम का नाम मेैं दू।
होठो में दबी तेरी मुस्कान को
मंजिल मैं, अपना बना दू ।

तू बोले तो, तेरी गम चुरालू
निली, तेरी आसमां को
इंद्रधनुष से सज दू ।
लिख दू, मेेैं खुद, तेरी तकदीर को ।

क़ैद कर लिया हैं, मैने तुझे
कांंच की दीवारों के बीच ।
ताकी दुनिया देखे तेरी सौंदर्य
पर छूने की तमन्ना, दिल मे हीं रहे ।

कप-कपाती इन होठों की खुशबू को
बोलती खामोशी इन आंखों को
चंचल तेरी इन कदमों को
बता तू, मैं प्यार का नाम दू ।

रचनाकारः- -तुल्सी श्रेष्ठ
Composed by Tulsi Shrestha
@copyright reserved
2018 October 30....6.38PM

Monday, April 1, 2019
Topic(s) of this poem: beauty,tulsi
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