अगर माँ नहीं होती Poem by Ratnesh Gandhi

अगर माँ नहीं होती

अगर माँ नहीं होती,
तो ये संसार नहीं होता,
ये देश नहीं होता,
ये ब्रम्हाण्ड नहीं होता।

सृष्टि की संरचना,
जीवों में प्राण की रचना,
ये ममता और ममत्व;
कुछ ख़ास नहीं होता,
अगर माँ नहीं होती।

करुणा और प्रेम की सागर है वो,
दया की साक्षात मूरत है वो,
मेरी भगवान है वो;
मेरी गुरु है वो;
जीवन की पहली किताब है वो।

मैं नहीं होता,
मुझमें संस्कार नहीं होते,
जीवन की विषम परिस्थितियों से;
लड़ने के आसार नहीं होते,

ये जीवन 'रत्न' नहीं होता,
अगर माँ नहीं होती।।

- रत्नेश गाँधी

Sunday, May 12, 2019
Topic(s) of this poem: mother
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success