अगर माँ नहीं होती,
तो ये संसार नहीं होता,
ये देश नहीं होता,
ये ब्रम्हाण्ड नहीं होता।
सृष्टि की संरचना,
जीवों में प्राण की रचना,
ये ममता और ममत्व;
कुछ ख़ास नहीं होता,
अगर माँ नहीं होती।
करुणा और प्रेम की सागर है वो,
दया की साक्षात मूरत है वो,
मेरी भगवान है वो;
मेरी गुरु है वो;
जीवन की पहली किताब है वो।
मैं नहीं होता,
मुझमें संस्कार नहीं होते,
जीवन की विषम परिस्थितियों से;
लड़ने के आसार नहीं होते,
ये जीवन 'रत्न' नहीं होता,
अगर माँ नहीं होती।।
- रत्नेश गाँधी
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