खोज Poem by Shobha Khare

खोज

जीवन की आख़िरी सांस तक
खतम न होगी खोज तुम्हारी
नव जीवन के नव प्रकाश मे
जाने की मेरी तैयारी I


देखूँगी नूतन द्र्श्य वहाँ
आलोक नया मै पाऊँगी
साथ तुम्हारे महा मिलन के
बंधन मे बंध जाऊँगी I

कहीं नहीं है अंत तुम्हारा
खत्म न होगी खोज तुम्हारी
नित नवीन लीला रचते तुम
हर लीला लगती है प्यारी II

Monday, February 2, 2015
Topic(s) of this poem: Life
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