लेला मजनू हीर राँझा के बाद फिर तू नहले पे दहला हो गया | Poem by Nageshwar Panchal

लेला मजनू हीर राँझा के बाद फिर तू नहले पे दहला हो गया |

Rating: 5.0

आंसू ऐसे गिरे उसके मेरे कब्र पर,
संग मेरे काफिला हो गया,
कोई उसको भी मिले मेरी तरह चाहने वाला
यारो अब तो वो अकेला हो गया |
कब तक ओड़नी मेरे नाम की पहनेगी तू उतर फेक,
ये दाग अच्छा ही सही पर रिश्ता ये मेला हो गया |
अब तो उस दर से देखूंगा तुजे दुल्हन बनते हुए,
शाहिद सलमान जो आये सोचूंगा साला कोन तेरा दूल्हा हो गया |
देख रहा हु तेरे बदन में सुस्ती सी छायी हे,
मेरे जाने से साला बदन भी निदाला हो गया ||
तू क्यों अब भजन मण्डली में जाने लगी यार
तेरी वजह से पूरा मोहल्ला बाबा का चेला हो गया|
तू मेरी कब्र पर फातिमा पड़ने क्या आई मेरा ही नुकसान हे
मेरा चेहरा छिपा था आँखों में वो भी आंसू से गिला हो गया |
रोती बिलखती लिपट गई थी मुझसे जब जान ना बची,
तेरी एस नादानी से पुरे शहर में हल्ला हो गया |
पांचाल इस कदर क्यों मोहब्त में लोग बिछड जाते हे,
लेला मजनू हीर राँझा के बाद फिर तू नहले पे दहला हो गया ||

Monday, March 10, 2014
Topic(s) of this poem: love
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