इश्क का कानून थोडा और सख्त हो Poem by Nageshwar Panchal

इश्क का कानून थोडा और सख्त हो

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इश्क का कानून थोडा और सख्त हो
तेरी मोहब्बत के तमाम दुसरे किस्से जब्त हो|
हमारे अंदर जो दोड रहा है बदल सा गया है
गुजारिश है खून अपना पानी से फिर रक्त हो|
दोहरा देना तू फिर कहानी उस सीता की
एक दफा फिर तिनके से तलवार पस्त हो |
और बारात दर पर तेरे दो पल में ले आऊगा
बस तेरी आँखों में ठहरने का बंदोबस्त हो|

Monday, March 10, 2014
Topic(s) of this poem: love
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