एक दफा तुझ पर नजर क्या पड़ी चाँद की Poem by Nageshwar Panchal

एक दफा तुझ पर नजर क्या पड़ी चाँद की

एक दफा तुझ पर नजर क्या पड़ी चाँद की
उसने खुद को आईने में देखना शुरू कर दिया |
तेरी तपिस का अहसास जबसे हुआ
सूरज ने खुद को सेकना शुरू कर दिया |
लबो को तेरी जब से छुआ हे मय ने
शराब ने खुद बहकना शुरू कर दिया |
तेरे हुस्न और मेरी मोहबत में जीत मेरी हुई
सुना हे तूने आजकल बहुत सवरना शुरू कर दिया |

Monday, March 10, 2014
Topic(s) of this poem: love
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