लफ्जो कि डाली से तोड़ ला कुछ लफ्ज़,
चल बात करे|
अहसास के कुछ लफ्ज़,
कुछ इबादत के,
कुछ बिखर गए हें निचे,
समेट ले ज़ज्बात के लफ्ज़|
इश्क के लफ्ज़ को जुबा पर सजा,
चल बात करे|
कुछ लफ्ज़ गल चुके हें, चाहत के भिगोने में|
कुछ लफ्ज़ पल रहे हे, दिल के किसी कोने मे|
रिवाजो कि मजबूरियों से,
देखो कही लफ्ज़ सड़ ना जाए|
ऊसूलो की बेडियों से,
देखो कही लफ्ज़ मर ना जाए|
चल लफ्ज़ को लफ्ज़ मे मर्ज करे|
कहाँ लेकर जायेंगे चल लफ्ज़ खर्च करे|
चल बात करे,
लफ्जों कि डाली से |
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