लफ्जो कि डाली से तोड़ ला कुछ लफ्ज़ Poem by Nageshwar Panchal

लफ्जो कि डाली से तोड़ ला कुछ लफ्ज़

लफ्जो कि डाली से तोड़ ला कुछ लफ्ज़,
चल बात करे|
अहसास के कुछ लफ्ज़,
कुछ इबादत के,
कुछ बिखर गए हें निचे,
समेट ले ज़ज्बात के लफ्ज़|
इश्क के लफ्ज़ को जुबा पर सजा,
चल बात करे|
कुछ लफ्ज़ गल चुके हें, चाहत के भिगोने में|
कुछ लफ्ज़ पल रहे हे, दिल के किसी कोने मे|
रिवाजो कि मजबूरियों से,
देखो कही लफ्ज़ सड़ ना जाए|
ऊसूलो की बेडियों से,
देखो कही लफ्ज़ मर ना जाए|
चल लफ्ज़ को लफ्ज़ मे मर्ज करे|
कहाँ लेकर जायेंगे चल लफ्ज़ खर्च करे|
चल बात करे,
लफ्जों कि डाली से |

Sunday, March 16, 2014
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success