हाल-ए-दिल कहूँ मैं क्या, किसे खोने से डरता है Poem by Abhishek Omprakash Mishra

हाल-ए-दिल कहूँ मैं क्या, किसे खोने से डरता है

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हाल-ए-दिल कहूँ मैं क्या, किसे खोने से डरता है
ये मेरा दिल तो बस तुमसे, जुदा होने से डरता है
गज़ब है मुश्किलें मेरी, कि मेरा दिल कभी यूँ तो
तेरे ख्वाबों में रहता था, वो अब सोने से डरता है

''कवि अभिषेक ओमप्रकाश मिश्रा''
03-1-2015-12.00pm

Saturday, January 3, 2015
Topic(s) of this poem: love and pain
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 03 January 2015

बहुत बढ़िया. ग़ज़ब की अदायगी है. लाजवाब पंक्तियाँ. मेरी बधाई स्वीकार करें, मित्र. हाल-ए-दिल कहूँ मैं क्या, किसे खोने से डरता है ये मेरा दिल तो बस तुमसे, जुदा होने से डरता है

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